फिरोजाबाद के इतिहास में पहली बार जैन विधि के अनुसार श्रावक बनाने की प्रक्रिया को मंत्रोच्चार पूर्वक परम पूज्य श्वेत पिच्छाचार्य श्री विद्यानंद जी मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के कर कमलों द्वारा 1146 विधि पूर्वक शास्त्रानुसार श्रावक दीक्षा संस्कार किये जायेंगे.ये आयोजन 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से श्री छदामी लाल जैन ट्रस्ट के अंतर्गत श्री महावीर मंदिर के विशाल प्रांगन में किया जायेगा.
इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए निशुल्क फॉर्म भरे जा रहे है जो मात्र दो दिन में 400 की संख्या पार कर गया है.श्रावक संस्कार सिर्फ 1146 बंधुओं के ही किये जायेंगे इसलिए पहले आओ पहले पो के अधर पर चयन होगा.
पूज्य एलाचार्य श्री से पूछने पर पता चला कि इस संस्कार महोत्सव में अष्ट मूलगुण (मध्य-मांस-मधु का त्याग तथा बड,पीपर,उमर,कठूमर,पाकर-पञ्च उदंबर फल त्याग) और सप्त व्यसन त्याग कराया जायेगा जो श्रावकों के जन्म से ही होता है लेकिन उनके विधिवत संस्कार न होने से वे मान्य नहीं होते.वैसे तो ये आठ वर्ष के बालक के संस्कार होते है लेकिन ये पद्धति लुप्त होने से सभी वर्ग के श्रावकों को सम्मिलित किया जायेगा.
आयोजकों ने बताया कि सभी श्रावकों को स्वनाम की प्रशस्ति पत्र,स्फटिक मणि जाप माला,शास्त्र,गुरु हस्तों से संस्कार आदि प्राप्त होंगे.कार्यक्रम का प्रसारण समस्त जैन चैनलों पर भी होगा.
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